Sunday, 27 November 2016

मेरे मन की बात.......आपसे

मेरे दूरस्थ होकर भी निकटस्थ जनों, आप मुझे नहीं जानते और न ही मैं आपको जानता हूं पर मैं आपको यहां से बराबर देख सकता हूं और आपके मन में क्या चल रहा है? इसको थोड़ा-थोड़ा समझ सकता हूं। मैं ये जान सकता हूं कि आप सभी में एक सामान्य बात है वो है जिज्ञासा.....जिज्ञासा और एक पिपासा जो हमको-आपको यहां-वहां भटकाती है। हम जानना चाहते हैं, हमारे पास कई प्रश्र हैं और उत्तर नहीं, हम बंधनों को तोडऩा चाहते हैं पर क्यों? इसका सही-सही जवाब किसी के पास नहीं है। हम प्रकाश को नहीं जानते और अंधकार के अनुभव को समझते ही नहीं हैं। हम अपने अपनों का आदर करते हैं पर उनकी बातों को नजरंदाज करते हैं। हम लोगों को देखते हैं उनके क्रियाकलापों को देखते हैं उनको आपसे समर्थन मांगते हुए देखते हैं। वो चाहते हैं कि आप उनका समर्थन करें, वो आपको कई कारण गिनवायेंगे आप भ्रमित हो जायेंगे। कुछ ऐसा हो जायेगा जो आपको शारीरिक और मानसिक रूप से झकझोर देगा, इससे आप चिंतित हो जाते हैं समाज में ये क्या हो रहा है? कई बार भ्रम की स्थिति में आप ये समझ ही नहीं पाते कि क्या गलत है और क्या सही? ये एक भयानक स्थिति है और कभी-कभी आप गलत के पक्ष को सही मानकर व्यवहार करते हैं और जब सत्य का ज्ञान होता है तो लज्जित हो जाते हैं कभी ऐसा भी हो सकता है कि आप जब तक सही बात को समझें तब तक बहुत देर हो चुकी हो और आप पश्चाताप की अग्रि में जलने लगें। अगर आप में जिज्ञासा है तो शायद मेरा पेज ब्लॉग आपकी जिज्ञासा का कुछ सीमा तक शमन कर सके। आइये आप और मैँ मिलकर सत्य की खोज करें और उस मार्ग पर गमन करें जहां हर ओर सत्य और शमन हो ताकि हम संपूर्णता को प्राप्त कर सकें जिसके बारे में हमारे प्राचीन ग्रंथों में कहा गया है। हम पूर्ण हो जाएं और मोक्ष मार्ग के पथिक हो जायें। आइये तो मिलकर ढूंढते हैं आप और मैं.......